ABHA Card: आज के समय में अस्पताल के चक्कर लगाते-लगाते सबसे बड़ी परेशानी क्या होती है? पुरानी फाइलें संभालकर रखना, रिपोर्ट ढूंढना, और हर बार डॉक्टर को फिर से पूरी कहानी बताना। कई बार तो पुरानी पर्ची मिलती ही नहीं और इलाज में देर हो जाती है। ऐसे में सरकार ने एक ऐसी सुविधा शुरू की है जिससे आपका पूरा हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से सुरक्षित रह सकता है। इसका नाम है ABHA कार्ड। अगर आपने अभी तक ABHA कार्ड नहीं बनवाया है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम की है। चलिए आराम से समझते हैं कि यह कार्ड क्या है और कैसे बनता है।
ABHA कार्ड क्या है और क्यों जरूरी है?
ABHA का पूरा नाम है आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट। यह एक डिजिटल हेल्थ आईडी की तरह काम करता है। जैसे आपका आधार नंबर आपकी पहचान बताता है, वैसे ही ABHA नंबर आपके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को जोड़ता है। जब आप किसी ऐसे अस्पताल या क्लिनिक में जाते हैं जो इस सिस्टम से जुड़ा है, तो डॉक्टर आपकी पुरानी रिपोर्ट, जांच और इलाज की जानकारी देख सकते हैं। इससे बार-बार टेस्ट कराने की जरूरत कम हो सकती है और इलाज जल्दी शुरू हो सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि आपको मोटी फाइल लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ती।
ABHA कार्ड से कैसे होगा तुरंत इलाज?
मान लीजिए आप किसी दूसरे शहर में हैं और अचानक तबीयत खराब हो गई। अगर आपका ABHA कार्ड बना हुआ है और अस्पताल इस सुविधा से जुड़ा है, तो डॉक्टर आपकी पुरानी मेडिकल हिस्ट्री देख सकते हैं। उन्हें यह पता चल जाएगा कि आपको पहले कौन-सी बीमारी रही है, कौन-सी दवा चल रही है और कौन-सी जांच पहले हो चुकी है। इससे सही इलाज देने में आसानी होती है। कई बार गलत दवा देने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि डॉक्टर को आपकी पूरी जानकारी मिल जाती है।
ABHA कार्ड कैसे बनवाएं?
ABHA कार्ड बनवाना बहुत आसान है। आप इसे घर बैठे मोबाइल से भी बना सकते हैं। इसके लिए आपको आधिकारिक हेल्थ वेबसाइट या ऐप पर जाना होता है। वहां आप आधार नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस की मदद से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए ताकि ओटीपी आए और पहचान पक्की हो सके। कुछ ही मिनट में आपका 14 अंकों का ABHA नंबर बन जाता है। चाहें तो आप नजदीकी सरकारी अस्पताल या हेल्थ सेंटर में जाकर भी मदद ले सकते हैं। वहां कर्मचारी आपको रजिस्ट्रेशन में सहायता कर देंगे।
कौन बनवा सकता है ABHA कार्ड?
भारत का कोई भी नागरिक ABHA कार्ड बनवा सकता है। इसके लिए उम्र की कोई सख्त सीमा नहीं है। बच्चों का भी कार्ड बन सकता है, लेकिन उसमें माता-पिता की जानकारी जुड़ती है। यह सुविधा पूरी तरह स्वैच्छिक है, यानी बनवाना या न बनवाना आपकी इच्छा पर है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपका इलाज आसान और तेज हो, तो इसे बनवा लेना समझदारी हो सकती है।
क्या आपका डेटा सुरक्षित रहेगा?
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या हमारी स्वास्थ्य जानकारी सुरक्षित रहेगी। सरकार का कहना है कि यह सिस्टम सुरक्षित है और आपकी अनुमति के बिना कोई आपकी जानकारी नहीं देख सकता। जब भी कोई डॉक्टर या अस्पताल आपकी जानकारी देखना चाहता है, तो आपकी मंजूरी जरूरी होती है। यानी कंट्रोल आपके हाथ में रहता है।
ABHA कार्ड के क्या फायदे हैं?
सबसे बड़ा फायदा है सुविधा। बार-बार कागज संभालने की जरूरत नहीं, रिपोर्ट खोने का डर नहीं, और डॉक्टर को पूरी जानकारी तुरंत मिल जाती है। अगर आप किसी बड़ी बीमारी का इलाज करा रहे हैं, तो अलग-अलग जगह की रिपोर्ट एक जगह जुड़ जाती है। इससे इलाज में साफ-साफ तस्वीर सामने आती है। धीरे-धीरे देश के ज्यादा अस्पताल इस सिस्टम से जुड़ रहे हैं, जिससे इसका फायदा और बढ़ेगा।
क्या यह बनवाना जरूरी है?
यह जरूरी नहीं है, लेकिन फायदेमंद जरूर है। जैसे हम बैंक खाता या आधार बनवाते हैं ताकि आगे काम आसान हो, वैसे ही ABHA कार्ड भविष्य के लिए एक सहूलियत है। खासकर बुजुर्गों और लंबे इलाज से गुजर रहे मरीजों के लिए यह काफी मददगार हो सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। ABHA कार्ड से जुड़ी ताजा और आधिकारिक जानकारी के लिए सरकारी हेल्थ पोर्टल या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से पुष्टि जरूर करें।